जय जोहार। सबले पहिली, मैं जम्मो रेडियो सुनइया भाई-बहिनी मन के सब स्वागत करत हंव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल….पढ़व आज के लोकवाणी म का होइस गोठ बात

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एंकर
–    सभी श्रोताओं को नमस्कार, जय जोहार।
–    आज हमारे साथ स्टूडियो में मौजूद हैं, छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी। वे आज से छत्तीसगढ़ की जनता के साथ बातचीत की एक नई शुरूआत कर रहे हैं। मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘लोकवाणी’ के माध्यम से वे छत्तीसगढ़ की जनता के सवालों के जवाब भी देंगे और अपने विचार भी रखेंगे।
–    हम आकाशवाणी की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी का हार्दिक अभिनंदन करते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    जय जोहार। सबले पहिली, मैं जम्मो रेडियो सुनइया भाई-बहिनी मन के सब स्वागत करत हंव। आम जनता, खेत-खार म काम-बुता करत किसान भाई-बहिनी मन, घर में अपन काम-बुता करत रेडियो सुनैया हमर दीदी-बहिनी मन, अलग-अलग जगह म अपन सुविधा ले मोर गोठ-बात सुनैया जम्मो सियान अउ संगवारी मन ल, दीदी-बहिनी अउ नोनी-बाबू मन ल जय जोहार।

एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, सबसे पहले जनता ये जरूर जानना चाहेगी कि ‘लोकवाणी’ का विचार आपके मन में कैसे आया ?
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    अब तो संचार के नवा-नवा माध्यम आ गे हे, लेकिन अभी भी रेडियो एक अइसे माध्यम हे, जेखर पहुंच अभी भी आमजनता तक म हे। ते पाय के मोला लागिस के रेडियो ल हमर बातचीत के माध्यम बनाना ठीक रइही।
–    मोला याद हे, 12 नवम्बर 1947 के दिन जब महात्मा गांधी देश ल कुरूक्षेत्र-हरियाणा में सम्बोधित करिस अउ रेडियो के माध्यम से जनता के बीच म अपन बात ल कहिस।
–    तब बापू कहे रहिसे के ‘मैं रेडियो ल ईश्वरीय चमत्कार मानथंव, यदि इहि बात ल कोनो सभा म जाके कहितेव तव कम आदमी सुन पातिस, लेकिन रेडियो के माध्यम से बहुत अकन आदमी कर अपन बात ल पहुंचाय जा सकथे। एकर सेति रेडियो आज भी सर्वश्रेष्ठ माध्यम हे।
–    हमर छत्तीसगढ़ के दूर-दराज म बसे गांव में, आदिवासी अंचल म जेमा बहुत ही बिरला आबादी हे, दूर-दूर तक के बसे हे। मैं चाहथंव वो सब मन के भावना से अवगत हो सकंव। आप मन के बात ल सुनव, अउ आप मन के जवाब दव। एकरे सेति हमन अब हर महीना लोकवाणी के माध्यम से आप मन के सामने रूबरू होबो।

एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ रेडियो से जुड़ी बहुत अच्छी बात याद की आपने। इससे रेडियो बिरादरी का गौरव भी बढ़ा है।
–    अब आज के मुख्य विषय पर आते हैं। हमने छत्तीसगढ़ में ‘कृषि तथा ग्रामीण विकास’ विषय पर जनता की भावनाएं आमंत्रित की थी। हमें बहुत उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।
–    2500 रू. क्विंटल में धान खरीदी/तेन्दूपत्ता संग्र्रहण पारिश्रमिक 4000 रू. प्रति मानक बोरा, हरेली, तीजा, विश्व आदिवासी दिवस, भक्त माता कर्मा जयंती और छठ पूजा पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा। ऐसे अनेक ऐतिहासिक फैसलों के लिए बहुत से भाई-बहनों ने बधाई संदेश भेजे हैं।
–    जिसमें शामिल हैं-लोहारा से गिरीश साहू, परपोड़ी से बुधवा, बेलसरी से दुर्गा प्रसाद पाण्डे, मरवाही से श्याम लाल, झीट-पाटन से भुवन लाल सिन्हा, पिपरिया-कबीरधाम से कमलकांत गुप्ता, पामगढ़ से चन्द्रशेखर खरे और भी अनेक श्रोता, तो आइये पहले इन संदेशों को सुन लेते हैं।
–     जी मैं चन्द्रशेखर खरे बोल रहा हूं, पामगढ़-जांजगीर से। भूपेश सरकार ने जो नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी जो योजना चलाई है, उसके लिए मैं बधाई देता हूं सरकार को।
–    गंगाराम साहू पोस्ट पिपरिया जिला-कबीरधाम। लोकवाणी के लिए महोदय जी ने जो शुरूआत की है, इसके लिए बहुत बहुत बधाई हो और बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
–     बुधवा परपोड़ी से ये बड़ा अच्छा कार्यक्रम निकाले है जनसाधारण के लिए। और धन्यवाद के पात्र है माननीय मुख्यमंत्री जी कि हरियाली त्यौहार को मनाया गया है।
–     दुर्गा प्रसाद पाण्डे बोल रहा हू, ग्राम बेलसरी, तखतपुर से। सर्वप्रथम तो अपने एकदम ठेठ छत्तीसगढ़ी सरकार बनने के लिए बधाई है। मेरी ओर से मुख्यमंत्री महोदय को।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    बधाई और शुभकामना संदेशों के लिए आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। निश्चित तौर पर इससे हम सबका उत्साह बढ़ा है।
–    आपकी प्रतिक्रिया जानकर हमें यह संतोष मिला है कि सरकार सही दिशा में काम कर रही है।
एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, धान के दाम को लेकर एक ओर लोगों में खुशी है तो दूसरी ओर यह संदेह है कि आगे उन्हंे यह दाम मिलेगा कि नहीं। आइये लेते हैं एक सवाल, जो सिर्फ लोहारा के गिरीश साहू का ही नहीं बल्कि पूरी किसान बिरादरी का है।
–     मैं ग्राम लोहारा से गिरीश कुमार साहू बालोद जिला से बोलत हव। हमारे छत्तीसगढ़ में 2500 रूपये में जो धान लिया है, उसी तरह आगे भी लेगा की नई लेगा ?
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    गिरीश भाई और सभी किसान साथियों। आपके खाते में 2500 रूपए क्ंिवटल की दर से धान का पैसा आ गया है, यह तो आप मानते हैं ना।
–    अब छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार है, इसलिए आपको न संदेह करने की जरूरत है और न ही किसी प्रकार की चिंता करने की।
–    अब हर साल आपका धान हम 2500 रू. क्ंिवटल में ही खरीदेंगे। इस फैसले से अब कोई ताकत हमें पीछे नहीं हटा सकती।
–    मुझे लगता है कि पिछले महीने केन्द्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य सिर्फ 65 रू. बढ़ाने की घोषणा की थी, उसके कारण आपके मन में भ्रम हुआ होगा। लेकिन आप ध्यान दीजिएगा कि हमने साफ घोषणा की थी कि आप लोग अपना धान रोक कर नहीं रखें। केन्द्र सरकार से चाहे जो दर मिले, हम अपने वायदे पर कायम रहेंगे। 2500 रूपए क्विंटल में धान खरीदा था और खरीदेंगे यह मेरा आप सबसे वादा है।
एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, श्रोताओं के सवालों से स्पष्ट है कि प्रदेश में ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजना को लेकर जबरदस्त उत्साह है। सर्वाधिक विचार तो इसी को लेकर सामने आए हैं। लोग जानना चाहते हैं कि इस विषय पर आपकी पूरी सोच क्या है? ‘सुराजी गांव योजना’ कितने दिनों में शबाब पर आ जाएगी? इससे ग्रामीण और किसान जनता को किस-किस तरह से लाभ मिलंेगे? अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को इससे कैसे मजबूती मिलेगी?
–    भाई लक्ष्मी यादव, कमलकांत गुप्ता, गोपाल प्रजापति, भुवन लाल सिन्हा, चंद्रकांत, भावेश यादव, गजानंद साहू, होरी लाल, सुखलाल भारती, मदन सेन, राम राजपूत, विशेषर सिंह और मालिक राम इनके साथ-साथ बहुत से साथी जानना चाहते हैं कि इस विषय पर आपकी पूरी सोच क्या हैं? माननीय मुख्यमंत्री जी, सभी की आवाजें सुनने में काफी समय लगेगा इसलिए आइये लक्ष्मी जी, गुलशन की आवाज में सुन लेते हैं, इससे संबंधित सवाल और आप कृपया सभी जवाब एक साथ दे दीजिएगा।
–    मेरा नाम लक्ष्मी कुमार यादव है। मैं खैरागढ़ जिला-राजनांदगांव से बोल रहा हूं। सर अभी तो अब इतने सारे बाड़ी-वाड़ी तो रह नहीं गये हैं, घुरवा भी नहीं रह गये हैं तो इसका क्या उपयोग होगा।
–    गुलशन कुमार तहसील मोहला, जिला-राजनांदगांव मेरा प्रश्न है कि छत्तीसगढ़ गांव में बसता हैं, तो हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे बनाएंगे। नई सरकार से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बारे में? कैसे विकास कर सकते हैं गांव की।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–        सवाल पूछने के लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
‘छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी
नरवा, गरवा, घुरवा, बारी
येला बचाना हे संगवारी’

–        मुझे खुशी है कि यह नारा न सिर्फ गांव-गांव, घर-घर में पहुंच गया है बल्कि उससे भी आगे मैं यह कहना चाहता हूँ कि छत्तीसगढ़ के जनजीवन में यह नारा उसी तरह से घुल-मिल गया है, जैसे शक्कर और पानी मिलकर शरबत बनता है।
–    वास्तव में छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी सदियों से हमारे मन के भीतर है। हमारी नस-नस में समायी हुई है। हमारी संस्कृति में रची-बसी है।
–    फर्क सिर्फ इतना आया है कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद और खासकर विगत 15 वर्षों में हम अपने पुरखों के रास्ते से भटक गए थे। जिसे दिल सही कहता था, उसे हम कर नहीं पाते थे और हमारे किसान भाइयों को जमाने की हवा के नाम पर बहाया जा रहा था।
–    आपकी सरकार ने आते ही यह फैसला कर लिया कि अपने ‘चार चिन्हारी-नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ को फिर से अपनी खोई हुई शक्ति, शान और मान वापस दिलाना है, तो उसमें आप जैसे जागरूक लोग जुड़ गए हैं और कारवां बनता चला गया।
–    जहॉ तक कि अर्थव्यवस्था का सवाल है तो यह बात बहुत साफ है कि जब हम छत्तीसगढ़ की समृद्धि और खुशहाली की कल्पना करते हैं तो हमारे ध्यान में खेत, किसान और गांव में रहने वाली जनता आती है। उनके रहन-सहन और बारहमासी रोजगार की तस्वीरें आती हैं कि असली छत्तीसगढ़ आज किस हालत में है और उसे किस हालत में होना चाहिए था।
–    आपको 17 दिसम्बर 2018 के पहले की परिस्थितियां याद होंगी। उस समय जब हम गांव-गांव का दौरा करते थे, तब हम देखते थे कि किस तरह किसान गांवों में आर्थिक संकट से जूझ रहा था, कुशासन था, बदहाली थी। किसान कैसे भटक रहे थे। धान का सही दाम पाने के लिए कैसे संघर्ष कर रहे थे। लाखों किसान कर्जदार और डिफाल्टर होने के कारण नए सिरे से खेती-किसानी नहीं कर पा रहे थे।
–    आप सबको इस बात का अनुभव है कि जब खेती थम जाती है तो कैसे राज्य का विकास थम जाता है। अच्छी खेती, अच्छी पैदावार हो किसानों को उसकी उपज का अच्छा दाम मिलता है, तब वह पैसा गांव से लेकर शहर तक के बाजारों में आता है।
–    इसलिए मैं कहता हूं, जब खेती चलती है तो कारखाने के पहिए भी चलते हैं। हमारी पूरी अर्थव्यवस्था की ताकत यदि किसी एक चीज से बढ़ेगी तो, वह खेती-किसानी है।
–    इसलिए हमने किसानों और उनके माध्यम से गांवों को समृद्ध बनाने की रणनीति अपनाई है।
–    और इसलिए आते ही हमने 2500 रू. क्ंिवटल में धान खरीदी, कर्ज माफी, सिंचाई कर माफी और आखिर में वन टाइम सेटलमेंट का निर्णय लिया, ताकि जितनी जल्दी हो सके किसानों को अपना खोया हुआ मान-सम्मान वापस मिल सके।
–    हमने खूब विचार-विमर्श किया। किसानों से, गांव वालों से, सबसे मिलकर यह तय किया कि खेती-किसानी और गांवों के हालात बदलने के लिए एक-दो उपाय से काम नहीं चलेगा। लम्बे समय तक चलने वाले कार्यक्रम बनाने पड़ेंगे ताकि खेती की जमीन में भी सुधार हो, गांव में पशुधन के रास्ते से आने वाली आय बढ़े, फूड प्रोसेसिंग इकाइयां लगे, गांव की उपज का गांवों में वेल्यू एडीशन हो। सिंचाई और निस्तार के लिए पानी की स्थाई व्यवस्था हो, जो कभी धोखा न दे। इन सबके चलते ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ को संस्थागत रूप से विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ ऐ योजना आखिर हे का।

माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–        हमन गांव-गांव किसान मन से, मजदूर मन से, संगवारी मन से, दीदी बहनी मन से भेट मुलाकात करत रेहेन। अउ गांव के समस्या चाहे चाहे शहर के समस्या ऐला बहुत नजदीक से हमन देखे हन। एक बात दिमाग म आईस सब साथी मन से चर्चा करेन, इही बात आइस छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी, येला बचाना हे संगवारी।
–    नरवा, हमर छत्तीसगढ़ म 20 हजार नरवा हे, 285 ठक नदिया हे, 85 नदी ऐसे हे जे ह बारो महिना पानी बोहाथे। ओखर बाद भी हमर सिंचिंत रकबा हे तेन केवल 31 प्रतिशत हे। हमन हा बरसत पानी ल सहेज नई पात हन। आज सबसे ज्यादा जेन समस्या हे एक समय रीहिस हे जब हमन ह तरिया के नरवा के अउ झिरिया के पानी ला पियत रेहेन। बाद म ट्यूबवेल आगे, अब कोनो तरिया के पानी ल पी नई सकय। कुआं के पानी आज कोनो उपयोग नई करत हे। बहुत कम होवत हे। जतका पानी हे तेन नलकुप से ट्यूबवेल से पानी पियत हन। लगातार जेन भूमिगत जल हे तेखर दोहन हमन करत हन। उलीचे के काम करत हन, भरे के काम ल एको कनिक नई करत हन। अउ ओखर से आज समस्या सबसे ज्यादा होथे पेयजल के निस्तार के अउ आगे बढ़बो त सिंचाई के। पानी नई गिरय, नरवा म धार नई बोहाय, त हमर ट्यूबवेल मा रिचार्ज नई होय येला किसान मन समझत हे। जहां पानी गिरिश नरवा बोहाईस तब सब हमर ट्यूबवेल रिचार्ज हो जाही। ये बात ल गांव के जेन अनपढ़ किसान हे तेनो ये बात ल समझथे। आज विज्ञान बहुत आगे बढ़ गेहे। हम सेटेलाईट से भी फोटो खींच सकत हन। जमीन के उपर भी, जमीन के अउ जमीन के नीचे भी हमर छत्तीसगढ़ सरकार के ऐखर व्यवस्था हे, के पूरा छत्तीसगढ़ के एक-एक इंच जमीन के नीचे कतेकन का चीज हे तेखरो जानकारी हे, पुर्नभरण कर सकन तेखर जानकारी हे ओखर आधार म हमन ह पूरा 1000 नरवा के हमर योजना बना चुके हन। अउ ओखर आधार म हमन ल आगे तेजी से हमन ल काम करना हे। ताकि वाटर रिचार्जिंग हो। हमन ल जेन छोटे-बड़े स्ट्रक्चर हमन खड़ा करबो जमीन के डुबान नई आना चाहिए। ये व्यवस्था ल भी देखबो। काबर हमर इहा 44 प्रतिशत जंगल हे त हमन ल कोई पर्यावरण के या वन अधिनियम के उल्लघंन भी नई करना हे हमन ल। अउ ओ स्ट्रक्चर खड़ा करबो छोटे-बड़े स्ट्रक्चर खड़ा करबो ताकि हमर सतही जल रहै, जमीन मे भी नमी रहै, अउ भूमिगत जल भी पुर्नभरण हो सकय। ओखर से फायदा ये रहही पर्यावरण म सुधार होही। तो ये वाटर रिचार्जिंग करबो। ओखर से बारो महिना किसान ल पानी मिलही। उद्योग ल पानी मिलही। निस्तार अउ पेयजल बर पानी मिलही, ये हमर नरवा योजना।
–    गरवा जेन योजना हे तेन हा एक समय रिहीस जब ऐ पशुधन ह हमर किसान के, मजदूर के, गांव के, गरीब क,े शहर के, रहैया मन के आर्थिक आय के श्रोत रिहीस हे। आज ओ हमर कमजोरी बन गे हे। गाय हा गरू होगे हे। कोनो अपन घर में गरूवा नई रखना चाहय। बड़े-बड़े जेन किसान हे, तेखर गोर्रा मन में अब मुसवा मन कबड्डी खेलत हे। कोनो गरवा रखना नई चाहत हे। स्थिति ये हे के हमर छत्तीसगढ़ म धान बोवत रेहेन, धान के बाद उतेरा लेत रेहेन, उतेरा ल तो भूला गे किसान ह। अब ऐके फसल बचा पाना मुश्किल हे। किसान फसल बचाय बर परेशान हे। सड़क म गरवा मन बैठ जथे। ओखर से आए दिन एक्सीडेंट होवत हे। कतको झन के जान चल देथे। कतको झन के हाथ-पाव टूटत हे, मवेशी मरथे तेन अलग, गाड़ी टुटथ फूटथ हे तेन अलग। आर्थिक नुकसान होथे, जान-माल के नुकसान होथे। कैसे ढंग से ये योजना लाभकारी होय। गोशाला बहुत झन चलात हे लेकिन होत का हे। गरवा बर चारा नई मिलत हे। लेकिन गोशाला चलईया मन मोटावत जात हे, सरकार से अनुदान मांगत हे। लेकिन अब ये जेन योजना हमन बनाए हन गांव-गांव म हमर गौठान के परम्परा रहीस हे। ये परम्परा ल हमन पुर्नजीवित करत हन अउ पुर्ननियोजन करत हन। सरकार ह घेरा बनाए के काम ल करही। मनरेगा के तहत हमन घेरा बनात हन। जेमा लगभग 2000 गांव ल हमन चिंहिंत करे हन ओमा काम चलत हे। 900 से उपर जेन गौठान हे तेन ल लोकार्पण कर देहन। अब ऐमा काम ऐ हे कि 5 एकड़ जमीन ल घेर दे, तब गांव के 1000 एकड़ ल घेरे के जरूरत नई हे। आज जेखर घर ट्यूबवेल हे तेन मन सबसे पहली का करथे। घेरा करथे खेत ला। कृषि लागत बाढ़ गे। यदि पांचे एकड़ ल घेर दन अउ गरवा ल उहा बैठार दन त ओ मन ला जतका भी दूसरा फसल लेना हे या बरसाती फसल भी लेना हे। त ओखर चिंता किसान ल नई करे बर लगए ओ मुक्त हो जाही। हमर खेती बच गे। एक फसल भी ले सकत हन दू फसल भी ले सकत हन अउ तीन फसल भी ले सकत हन। लेकिन जब गरवा ल हमन गौठान मे बैठारबो त ओखर बर पानी के व्यवस्था सरकार करत हे ओखर चारा बर 10 एकड़ चिन्हित करे रेहेन त बारहो महिना गरवा ल हरियर चारा मिलय। येखर बर ओ जेन व्यवस्था हे तेन अपन आप से आर्थिक रूप से संपन्न हे।
–    हमन जेन सोचथन गोबर से पैसा निकालबो। गोबर से कम्पोस्ट खाद बना। गोबर से वर्मी खाद बना। जेन गोबर ल हमन ट्रॉली म खरीदत रेहेन। आज ओ किलो म बेचावत हे। 7 रूपया 8 रूपया किलो म वर्मी खाद बिकत हे। हमन गौठान समिति बनाबो, जेमा गांव के सरपंच हे सचिव हे, गांव के जेन बुद्धिजीवी मन हे अउ जेन स्वसहायता समूह हे सब ल जोड़बो। ताकि उहा न केवल वर्मी खाद अउ कम्पोस्ट खाद बल्कि अब तो हमर जेन बहनी मन हे ते मन तो ओखर सेे उबटन भी बनाथे, ओखर ले धूप भी बनाथ,े अउ ओखर से पैसा कमात हे। गौमूत्र से फिनायल भी बनाथ हे। अउ दूसर प्रकार के दवाई बनात हे। तो हमर ऐखर से फायदा ये होही कि कृषि लागत कम होही। जैविक खेती तरफ बढ़बो, आज जेन फसल के कारण से जेन बिमारी होथे चाहे ओ साग भाजी हो या चाहे अनाज हो। अतेक अकन हमन ह रसायनिक खाद अउ दवाई डालत हन जेखर कारण से फसल ह, जहरीला होवत जाथ हे। अनाज जहरीला होवत जात हे। सब्जी भाजी, फल मन जहरीला होवत जात हे। जेखर कारण अनेक प्रकार के बिमारी होथे। यदि ऐखर से बिमारी से बचना हे तो हमन ल ऐ दिशा में आगे बढ़ना है। अउ ओ दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ह मजबूत कदम उठाए हे। ओखर से का होही कि वर्मी खाद, कम्पोस्ट खाद जब हमर खेत म जाही त हमर खेत के उर्वरा शक्ति बडही बिमारी कमती लगही, बिमारी कमती होही त पेस्टीसाईड के उपयोग नई होए। कृषि लागत भी कम होही। जेन उपभोक्ता हे तेन ल शुद्ध चीज मिलही। ओखर से बिमारी भी कम होही। ये होगे हमर गरवा।
–    अउ घुरवा ले कम्पोस्ट खाद बनाबो, घर के भी कचरा ल उहे लेग जबो, त हमर गांव के स्वच्छता अभियान भी चलही। अब सवाल हे गरवा बर चारा। अब एक तरफ 10 एकड़ जमीन ल हमन चिन्हिंत करे हन। तेमा हरियर चारा मिलही। किसान मन अपन जेन पैरा ल धान लुये के बाद पैरा ल छोड़ देथे अउ माचिस मार के भुर्री बार देथे। पर्यावरण असंतुलित हो गेहे। सुप्रीम कोर्ट तक चिंतिंत हे। के दिल्ली ल गैस के चेम्बर बना देहे। आज छत्तीसगढ़ सरकार ह ओ दिशा म काम करत हे। किसान मन ल कहत हन कि जेन जब गरवा ह तुहर हे त पैरा ल तुही मन दव। जब तुही मन बर पम्प लगाये हन। उही म सोलर पंप भी लगाय हन। पंप से चेप कटर चालू करबो। ताकि कुट्टी काट सकन। पर्यावरण सुधान भी होगे। पैरा ल इकठ्ठा भी कर देन। मवेशी ल चारा मिल गे। नस्ल सुधार होही। त गांव म दूध-दही के नदिया बोहाही। त गांव ल सपन्न करना हे। ये पूरा एक साईकिल हे। अउ येला पूरा हमन करबो। ये सरकार के भरोसा नई, सरकार त शुरू करके देदीही। बचत गांव वाला मन ल चलाना हे। गांव वाला मन येमा सहर्ष स्वीकार भी करत हे। अउ सब जिहा-जिहा जाथव सब किसान मन हमर गांव म गौठान कब शुरू होगी, ऐसे योजना जेन ल हर किसान चाहत हे। हर ग्रामीण चाहत हे के हमरो गांव म होय अउ गांव वाला बस नहीं शहर वाला मन भी कहत हे के भई ये गौठान योजना ल हमर शहर म काबर लागू नई करत हस। त उहो घलो शुरूआत करे हन। खुले म मवेशी जेन चरत हे। आज नगर निगम म वर्मी खाद या दवाई बर हार्टीकल्चर बर सब खर्चा करत हे। त इही जेन गौठान हे तेन शहर म बनही। तेने गौठान में वर्मी खाद बनही तेन ल खरीद लैय। ताकि ओ जो काम करैया हे गौठान म काम करत हे तेन मन ल रोजी भी मिल जाए। दूसरा हमर जेन हार्टीकल्चर हे तेन, गांव के साथ-साथ शहर भी बिल्कुल हरा-भरा होना चाहिए। त ये हा होंगे छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी-नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी।
एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, बहुत से किसान भाइयों ने इस साल खेती-बाड़ी के हाल को लेकर सवाल पूछे हैं। राज्य सरकार ने क्या तैयारी की है, जिससे किसानों को कोई तकलीफ न हो?
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    प्रदेश में इन दिनों किसानी का सीजन चल रहा है। किसान भाई अपने बियासी, रोपाई में जुटे हैं। हमने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराएं। अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग करते रहंे।
–    खरीफ सीजन में किसानों को सहकारी समिति और अन्य संस्थाओं के माध्यम से 8 लाख किं्वटल से अधिक बीज तथा 7 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है।
–    जहां वर्षा पर्याप्त है, वहां खाद-बीज, दवा में कमी न होने पाए, इसके लिए न सिर्फ सही समय पर भण्डारण किया गया है, बल्कि राज्य एवं जिलास्तर पर उड़नदस्ता बनाकर निगरानी भी की जा रही है।
एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, बिधियापुर-धमधा के श्री प्रदीप शर्मा, आमापाली-धरमजयगढ़ के किसान श्री दुनित राम वर्मा, बलौदाबाजार से श्री लाल सिंह कोसले और भी अनेक श्रोता इस वर्ष मानसून की असफलता को लेकर चिंता जता रहे हैं। राज्य में वर्षा की स्थिति क्या है और ऐसी स्थिति में किसान भाइयों को किस तरह से काम करना चाहिए। राज्य शासन की क्या सहायता मिल सकती है, कृपया इस संबंध में बताने का कष्ट करें।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    मैं किसान भाइयों से यह अनुरोध करना चाहता हूं कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने आपको कमजोर न समझंे और न ही हिम्मत हारंे।
–    वर्षा आज की तारीख में कृषि कार्य करने के लिए पर्याप्त हो चुका है। अल्प वर्षा या खण्ड वर्षा की स्थिति में किसानों के पास अनेक विकल्प होते हैं। कम समय और कम पानी में पकने वाली किस्मों से किसानों को होने वाली क्षति को कुछ हद तक रोका जा सकता है। हम सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ऐसी फसलों के बीज उपलब्ध कराएं हैं।
–    ‘फसल बीमा योजना’ का लाभ किसानों को मिले, इसके लिए तैयारी की गई है। हमने लक्ष्य रखा है कि 15 अगस्त के पहले अच्छी तरह छान-बीन कर लिया जाए, ताकि कोई भी किसान न छूटे, सबके प्रीमियम सही समय पर चला जाए।
–    बीते अनुभव से सीख लेकर सावधानी बरतें। गड़बड़ी होने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल
एंकर
–    माननीय मुख्यमंत्री जी, कहीं-कहीं बिजली प्रदाय में अवरोध की शिकायत मिली है। जबकि पिछले 6 माह में विद्युत विकास को लेकर जो काम हुए है उसकी तारीफ भी हो रही है। इस सम्बंध में आप क्या कहना चाहेंगे।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
–    मैं बताना चाहता हूॅ कि छत्तीसगढ़ में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता देश में सर्वाधिक है ऐसा मैं नहीं कहता भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत संस्था सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने अपने रिपोर्ट में यह बात कही है।
–    खराब मौसम में होने वाली टूट-फूट के कारण आने वाले व्यवधान को दूर करने में जो समय लगता है उसे छोड़ दे तो मैं आपको आश्वस्त करता हूॅ कि प्रदेश में किसी तरह का बिजली संकट नहीं है। आपके लिए भरपूर बिजली उपलब्ध है और आपूर्ति की जा रही है।
–    मैं आपको बताना चाहूंगा कि बिजली प्रदाय में सुधार के लिए हमने बड़ा अभियान चलाया है। जिसके कारण सिर्फ 6 माह में अभूतपूर्व कार्य किए गए है।
–    316 नए उपकेन्द्र बनाने का काम तेजी से पूरा करने का निर्णय लिया गया था, जिसमें से 280 उपकेन्द्रों का काम विभिन्न योजनाओं के तहत पूरा हो चुका है। पुराने उपकेन्द्रों में 210 नए ट्रांसफार्मर लगाने तथा क्षमता बढ़ाने के काम किए गए हैं।
–    सरगुजा में छत्तीसगढ़ की बिजली पहुंचाने और गरियाबंद में कनेक्टिविटी की समस्या हल करने के ऐसे इंतजाम किए गए हैं, जिसका इंतजार बरसों से था।
–    हमारी सरकार ने किसानों को निःशुल्क बिजली देने की योजना जारी रखी है, जिसका लाभ 5 लाख किसानों को मिल रहा है। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के किसानों को तो पूरी खपत पर बिजली बिल से छूट दी गई है।
–        जिन स्थानों पर बिजली की पहुंच नहीं है, वहां सौर ऊर्जा से बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं।
–    अब बिजली किसानों की सबसे भरोसेमंद साथी बनेगी। इस बारे में किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
–    सभी श्रोताओं को बहुत-बहुत धन्यवाद कि आप लोगों ने अपना काफी समय देकर सवाल किए और मेरे जवाब तथा मेरे विचारों से अवगत होने का अवसर दिया।
–    नमस्कार, जय-जोहार, जय हिन्द, जय छत्तीसगढ़।
एंकर
–    श्रोताओं, मैं एक बार फिर यह बताना चाहता हूॅ कि लोकवाणी के लिए बहुत से सवाल मिले लेकिन समय सीमा में सभी सवालों को लेना संभव नहीं था इसलिए कुछ प्रतिनिधि सवालों के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी के विचार जानने का प्रयास किया गया। हमें लगता है कि मुख्यमंत्री जी ने काफी विस्तार से अपनी बात कही है जिससे लगभग हर सवाल का जवाब मिल गया है।
–    अब लोकवाणी का आगामी प्रसारण 08 सितम्बर 2019 को होगा। विषय होगा ’’युवा तथा शिक्षा’’ इस विषय पर हमारे श्रोता अपने विचार 28, 29 एवं 30 अगस्त के बीच रख सकेंगे। पहले की तरह ही आप फोन नम्बर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर दोपहर 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकार्ड करा सकते हैं और इसी के साथ आज का ये कार्यक्रम सम्पन्न होता है। नमस्कार!

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